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चलते रहने की ज़िद ! दृढ़ रहने पर प्रेरणादायक कहानी

यह कहानी अपना निर्णय दृढ़ करनेवाली एक प्रेरणादायक कहानी है | इस कहानी के द्वारा यह पता चलता है की , आप कोई भी काम करो वो जल्दी – जल्दी न करके धीरे करे लेकिन पूरा कीजिये | अगर आप एक ब्लॉगर हो तो आप वक्त निकालकर हरदिन सिर्फ एक ही पोस्ट लिखिए | क्योंकि बुंद -बुंद से घाट भरता है |

chalte rahne ki zid

विजय पिछले चार-पांच सालों से अपने शहर में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेता था…लेकिन कभी भी उसने रेस पूरी नहीं की थी |

पर इस बार वह बहुत एक्साइटेड था | क्योंकि पिछले कई महीनों से वह रोज सुबह उठकर दौड़ने की प्रैक्टिस कर रहा था और उसे पूरा भरोसा था कि वह इस साल की मैराथन रेस ज़रूर पूरी कर लेगा |

देखते-देखते मैराथन का दिन भी आ गया और धायं की आवाज़ के साथ रेस शुरू हुई | बाकी धावकों की तरह विजय ने भी दौड़ना शुरू किया |

वह जोश से भरा हुआ था, और बड़े अच्छे ढंग से दौड़ रहा था | लेकिन आधी रेस पूरी करने के बाद विजय बिलकुल थक गया और उसके जी में आया कि बस अब वहीं बैठ जाए…

वह ऐसा सोच ही रहा था कि तभी उसने खुद को ललकारा…

रुको मत विजय! आगे बढ़ते रहो…अगर तुम दौड़ नहीं सकते, तो कम से कम जॉग करते हुए तो आगे बढ़ सकते हो…आगे बढ़ो…

और विजय पहले की अपेक्षा धीमी गति से आगे बढ़ने लगा |

कुछ किलो मीटर इसी तरह दौड़ने के बाद विजय को लगा कि उसके पैर अब और आगे नहीं बढ़ सकते…वह लड़खड़ाने लगा | विजय के अन्दर विचार आया….अब बस…और नहीं बढ़ सकता!

लेकिन एक बार फिर विजय ने खुद को समझाया…

रुको मत विजय …अगर तुम जॉग नहीं कर सकते तो क्या… कम से कम तुम चल तो सकते हो….चलते रहो |

विजय अब जॉग करने की बजाय धीरे-धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ने लगा |

बहुत से धावक विजय से आगे निकल चुके थे और जो पीछे थे वे भी अब आसानी से उसे पार कर रहे थे…विजय उन्हें आगे जाने देने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था | चलते-चलते विजय को फिनिशिंग पॉइंट दिखने लगा…लेकिन तभी वह अचानक से लड़खड़ा कर गिर पड़ा… उसके बाएँ पैर की नसें खिंच गयी थीं |

“अब कुछ भी हो जाए मैं आगे नहीं बढ़ सकता…”, जमीन पर पड़े-पड़े विजय के मन में ख़याल आया |

लेकिन अगले पल ही वो जोर से चीखा….

नहीं! आज चाहे जो हो जाए मैं ये रेस पूरी करके रहूँगा…ये मेरी ज़िद है…माना मैं चल नहीं सकता लेकिन लड़खड़ाते-लड़खड़ाते ही सही इस रेस को पूरा ज़रूर करूँगा….

विजय ने साहस दिखाया और एक बार फिर असहनीय पीड़ा सहते हुए आगे बढ़ने लगा….और इस बार वह तब तक बढ़ता रहा….तब तक बढ़ता रहा…जब तक उसने फिनिशिंग लाइन पार नहीं कर ली!

और लाइन पार करते ही वह जमीन पर लेट गया…उसके आँखों से आंसू बह रह थे |

विजय ने रेस पूरी कर ली थी…उसके चेहरे पर इतनी ख़ुशी और मन में इतनी संतुष्टि कभी नहीं आई थी…आज विजय ने अपने चलते रहने की ज़िद के कारण न सिर्फ एक रेस पूरी की थी बल्कि ज़िन्दगी की बाकी रेसों के लिए भी खुद को तैयार कर लिया था |

दोस्तों, चलते रहने की ज़िद हमें किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकती है | बाधाओं के आने पर हार मत मानिए…

ना चाहते हुए भी कई बार conditions ऐसी हो जाती हैं कि आप बहुत कुछ नहीं कर सकते! पर ऐसी कंडीशन को “कुछ भी ना करने” का excuse मत बनाइए |

घर में मेहमान हैं आप 8 घंटे नहीं पढ़ सकते….कोई बात नहीं 2 घंटे तो पढ़िए…

बारिश हो रही है…आप 10 कस्टमर्स से नहीं मिल सकते…कम से कम 2-3 से तो मिलिए…

एकदम से रुकिए नहीं… थोड़ा-थोड़ा ही सही आगे तो बढ़िये |

और जब आप ऐसा करेंगे तो विजय की तरह आप भी अपने ज़िन्दगी की रेस ज़रूर पूरी कर पायेंगे और अपने अन्दर उस ख़ुशी उस संतुष्टि को महसूस कर पायेंगे जो सिर्फ चलते रहने की ज़िद से आती है!

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Srushti Tapase

मेरा नाम सृष्टि तपासे है और मै प्यारी ख़बर की Co-Founder हूं | इस ब्लॉग पर आपको Motivational Story, Essay, Speech, अनमोल विचार , प्रेरणादायक कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी | आपके सहयोग से मै अच्छी जानकारी लिखने की कोशिश करुँगी | अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

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