Chanakya Neeti Part-2 चाणक्य नीति भाग -२ सफ़लता पाने के लिए

आचार्य चाणक्य एक ऐसे विद्वान हो चुके है जिन्होंने अर्थशास्त्र लिखा है | आचार्य चाणक्य बहोत ही बुद्धिमान थे | उनकी कुछ चाणक्य नीति है इसके बारे में आपको जानकारी रहनी चाहिये | इस से आप निश्चित रूप से सफ़लता पाओगे | Chanakya Neeti Part-2 चाणक्य नीति भाग -२ सफ़लता पाने के लिए

Chanakya Neeti Part-2

Chanakya Neeti Part-2 चाणक्य नीति भाग -२ सफ़लता पाने के लिए

चाणक्य नीति 1 :- साहसी लोगों को अपना कर्तव्य प्रिय होता है |

चाणक्य नीति 2 :- स्वयं को अमर मानकर धन का संग्रह करे |

चाणक्य नीति 3 :- गुणी व्यक्ती का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है |

चाणक्य नीति 4 :- दुष्ट व्यक्ती पर उपकार नहीं करना चाहिए |

चाणक्य नीति 5 :- मर्यादा का कभी उल्लंघन न करे |

चाणक्य नीति 6 :- चाणक्य कहते है की जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए , परंतु इसके साथ ही अच्छे    मित्र के संबंध में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए , क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है | अतः सावधानी अत्यंत आवश्यक है |

चाणक्य नीति 7 :- नित्य दूसरों को समभागी बनाए |

चाणक्य नीति 8 :- अतिथि का सत्कार न करने वाला , थके – हारे को आश्रय न देने वाला और दुसरे का हिस्सा हड़प करने वाला , ये सब लोग महापापी होते है |

चाणक्य नीति 9 :- पृथ्वी सत्य की शक्ती द्वारा समर्थित है ; ये सत्य की शक्ति ही है जो सूरज को चमक और हवा को गति देती है ; दरअसल सभी चीजे सत्य पर निर्भर करती है |

चाणक्य नीति 10 :- धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते है |

चाणक्य नीति 11 :- पुरुषों में नाई , स्त्रियों में मालिन , पक्षियों में कौआ तथा पशुओं में गीदड़ को धूर्त माना गया है | ये अनावश्यक ही किसी का कार्य बिगाड़ने में रुची रखते है |

चाणक्य नीति 12 :- बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते |

चाणक्य नीति 13 :- अप्रिय बोलना , दुष्टों की संगति , क्रोध करना , स्वजन से बैर ये सब नरक वासियों के लक्षण है |

चाणक्य नीति 14 :- वेद से बाहर कोई धर्म नहीं है |

चाणक्य नीति 15 :- अग्नि में दुर्बलता नहीं होती |

चाणक्य नीति 16 :- सिद्ध हुए कार्य का प्रकाशन करना ही उचित कर्तव्य होना चाहिए |

चाणक्य नीति 17 :- कार्य के लक्षण ही सफ़लता – असफलता के संकेत दे देते है |

चाणक्य नीति 18 :- धैर्यवान व्यक्ति अपने धैर्यों से रोगों को भी जीत लेता है |

चाणक्य नीति 19 :- न जाने योग्य जगहों पर जाने से आयु , यश और पूण्य क्षीण हो जाते है |

चाणक्य नीति 20 :- कई तरह की नेत्र हीनता होती है | कुछ जन्म से अंधे होते है और कुछ आँखे होते हुए भी अंधे होते है | काम – वासना में हुए अंधे को कुछ नहीं सूझता है , मदांध को भी कुछ नहीं दिखाई पड़ता | लोभी भी लोभ के वशीभूत नेत्र हीन हो जाता है | इस तरह के लोग आँख वाले अंधे कहलाते है |

चाणक्य नीति 21 :– राजा के प्रतिकूल आचरण नहीं करना चाहिए |

चाणक्य नीति 22 :- दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता |

चाणक्य नीति 23 :- घर आए अतिथि का विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए |

चाणक्य नीति 24 :- बिना उपाय के किए गए कार्य प्रयत्न करने पर भी बचाए नहीं जा सकते , नष्ट हो जाते है |

चाणक्य नीति 25 :- तपस्वियों को सदैव पूजा करने योग्य मानना चाहिए |

चाणक्य नीति 26 :- संग्रहित धन का व्यय होते रहने से ही उसमे निरंतर वृद्धि संभव है | जैसे तालाब का पानी एक ही जगह पड़ा रहने की वजह से दूषित हो जाता है , वह पीने योग्य नहीं रहता – इसी प्रकार यदि धन का सदुपयोग न हो तो वह किसी काम का नहीं रहता है |

चाणक्य नीति 27 :- क्षमा करने योग्य पुरुष को दु:खी न करें |

चाणक्य नीति 28 :- विषहीन सर्प को भी अपनी रक्षा के लिए फन फैलाना पड़ता है |

चाणक्य नीति 29 :- जन्म -मरण में दु:ख ही है |

चाणक्य नीति 30 :- अगर मुर्ख व्यक्ति चारो वेद और अनेक धर्म पढ़ ले , फिर भी जैसे सब्जी के रस में डूबा चमचा रस के स्वाद को नहीं जानता , वैसे ही मुर्ख अपनी आत्मा को नहीं जान पाता |

चाणक्य नीति 31 :- आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते |

चाणक्य नीति 32 :- पराई स्त्री के साथ व्यभिचार करने वाला , गुरु और देवालय का धन हरने वाला और हर प्रकार के प्राणियों के साथ रहने वाला व्यक्ति यदि ब्राम्हण भी है तो वह चांडाल के समान है |

चाणक्य नीति 33 :- जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है , दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता , वही सच्चा विद्वान और ब्राम्हण है |

चाणक्य नीति 34 :- ज्ञानियों में भी दोष सुलभ है |

चाणक्य नीति 35 :- हर पल अपने प्रभुत्त्व को बनाए रखना ही कर्तव्य है |

चाणक्य नीति 36 :- प्रयत्न न करने से कार्य में विघ्न पड़ता है |

चाणक्य नीति 37 :- जैसी शिक्षा , वैसी बुद्धि |

चाणक्य नीति 38 :- किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें |

चाणक्य नीति 39 :- ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुएँ से जल निकालती है | अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति सदैव मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है |

चाणक्य नीति 40 :- भावनाएं इंसान को इंसान से जोड़ती है | दूर रहनेवाला भी यदि हमारा प्रिय है तो वह हमेशा दिल के पास रहता है , जब की पास रहने वाला भी हमारे दिल से कोसों दूर ही रहता है क्योंकि उसके लिए हमारे दिल में जगह नहीं होती |

चाणक्य नीति 41 :- सत्संग से स्वर्ग में रहने का सुख मिलता है |

चाणक्य नीति 42 :- कोयल का रूप उसका स्वर है , पतिव्रता होना ही स्त्रियों की सुंदरता है | कुरूप लोगों की विद्या ही उनका स्वरुप है तथा तपस्वियों का रूप क्षमा करना है |

चाणक्य नीति 43 :- भूमि , धन – व्यापार , उद्योग -धंधो से आय के साधन भी बढ़ते है |

चाणक्य नीति 44 :- जैसा बीज होता है , वैसा ही फल होता है |

चाणक्य नीति 45 :- धन होने पर अल्प प्रयत्न करने से कार्य पूर्ण हो जाते है |

चाणक्य नीति 46 :- बहुमत का विरोध करने वाले एक व्यक्ति का अनुगमन नहीं करना चाहिए |

चाणक्य नीति 47 :- गुरुजनों की माता का स्थान सर्वोच्च होता है |

चाणक्य नीति 48 :- कार्य करने वाले के लिए उपाय सहायक होता है |

चाणक्य नीति 49 :- सत्य से स्वर्ग की प्राप्ती होती है |

चाणक्य नीति 50 :- जो स्त्री पतिव्रता है , प्रेमी है , सत्य बोलती है , पवित्र और चतुर है – वह निश्चित ही वरणीय है | ऐसी स्त्री पानेवाला सचमुच ही सौभाग्यशाली होता है |

I hoped Chanakya Neeti Part-2 चाणक्य नीति भाग -२ सफ़लता पाने के लिए यह आपको पसंद आयी होगी | इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों को साथ share करना ना भूलिए |

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