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आजादी के महानायक मंगल पांडे की जीवनी Mangal Pandey Biography In Hindi

Mangal Pandey Biography In Hindi स्वतंत्रता संग्राम की बात हो और अमर जवान मंगल पांडे का जिक्र ना हो, ऐसा संभव नहीं, अपनी भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए संघर्ष करने वाले इस वीर से तो एक बार अंग्रेज शासन भी बुरी तरह से कांप गया था। मंगल पांडे आजादी के लिए शहीद होने वाले पहले सेनानी थे। मंगल पांडे भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के जनक कहे जाते हैं। मंगल पांडे के द्वारा भड़काई गयी विरोध की चिंगारी ने देखते ही देखते आग का जन्म लिया और ब्रिटिश सरकार का तख्तो ताज हिला कर रख दिया। हालाँकि अंग्रेजों ने इस क्रांति को दबा दिया पर मंगल पांडे की शहादत ने देश में जो क्रांति के बीज बोए उसने अंग्रेजी हुकुमत को 100 साल के अन्दर ही भारत से उखाड़ फेका।

Mangal Pandey Biography In Hindi

आजादी के महानायक मंगल पांडे की जीवनी Mangal Pandey Biography In Hindi

प्रारंभिक जीवन :-

मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी 1831 को संयुक प्रांत के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम दिवाकर पांडे तथा माता का नाम श्रीमती अभय रानी था। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। हर साल बाढ़ आने की वजह से फसल भी बर्बाद हो जाती थी। सामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण युवावस्था में उन्हें रोजी-रोटी की मजबूरी में अंग्रेजों की फौज में नौकरी करने पर मजबूर कर दिया। वो सन 1849 में 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए। मंगल बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना में एक सिपाही थे।

भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम :-

मंगल पांडे जब 22 वर्ष के थे तब ही उन्होंने ईस्ट इंडिया कम्पनी जॉइन कर ली थी। उनकी नियुक्ति अकबरपुर के एक ब्रिगेड में हुयी थी जो की मार्च पास्ट कर रही थी। शुरू में वो अपने मिलिट्री करियर के प्रति बहुत उत्साहित थे,उनके रेजिमेंट में अन्य ब्राह्मिण युवा भी थे,धीरे-धीरे उनका मिलिट्री सर्विस से मोह भंग होने लग गया, बैरकपुर में पोस्टिंग के दौरान हुए एक घटना-क्रम ने उनका जीवन बदल दिया था।

उस समय सैनिकों के बीच यह अफवाह फैलाई गई थी कि इन कारतूसों को बनाने में जानवरों (गाय तथा सुअर) की चर्बी का प्रयोग किया गया है जब कि न तो हिन्दुओं द्वारा और न ही मुसलमानों द्वारा इसका सेवन किया जाता है। कारतूस पर लगे हुए कवर को हटाने के लिए उसे दाँत से काटा जाता था, जिसका सेना में हिंदू और मुस्लिम दोनों सैनिकों द्वारा तिरस्कार किया गया।

आधुनिक युग में मंगल पांडे :-

मंगल पांडे के जीवन के पर फिल्म और नाटक प्रदर्शित हुए हैं और पुस्तकें भी लिखी जा चुकी हैं। सन 2005 में प्रसिद्ध अभिनेता आमिर खान द्वारा अभिनित ‘मंगल पांडे: द राइजिंग’ प्रदर्शित हुई। इस फिल्म का निर्देशन केतन मेहता ने किया था। सन 2005 में ही ‘द रोटी रिबेलियन’ नामक नाटक का भी मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन और निर्देशन सुप्रिया करुणाकरण ने किया था। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने मंगल पांडे पर यह सवाल उठाया है कि क्या मंगल पांडे एक बहादुर शहीद थे या फिर नशे का सेवन करके अपने अधिकारियों पर हमला किया था।

मंगल पांडे को फांसी :-

अदालत में मंगल पांडे पर मुकदमा चला और मंगल पांडे ने अंग्रेज अफसर की हत्या करना कुबूल ककर लिया। इसके लिए मंगल पांडे को फांसी की सजा सुनाई गयी। मंगल पांडे को 18 अप्रैल 1857 को फांसी होनी थी लेकिन देश की जनता में मंगल पांडे की वीरता को देखकर जोश जाग उठा था और कोई भी जल्लाद मंगल पांडे को फांसी पर चढाने को तैयार नहीं था।

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Srushti Tapase

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