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प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi

Poem On Nature In Hindi प्रकृति मानव गतिविधियों से स्वतंत्र पृथ्वी पर प्राकृतिक सामग्री और भौतिक दुनिया का निर्माण है। प्रकृति की सुंदरता और समृद्धि विविध और बड़े पैमाने पर है। प्रकृति हमें आनंद लेने के लिए कई तरह की आनंद प्रदान करती है और हमारी जीवन समर्थन प्रणाली है। भोजन, आश्रय, पानी और हवा जैसी हमारी मूलभूत आवश्यकताएं प्रकृति की देन हैं।

Poem On Nature In Hindi

प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi

मनुष्य का प्रकृति के साथ मजबूत संबंध और अंतर्संबंध है। प्रकृति में भागना मन और शरीर को ठीक करता है और हमारी आत्मा को शांत करता है। चाहे जो भी प्रकृति हमें प्रदान करती है वह प्रकृति को पोषित करने की हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

प्रकृति वह प्राकृतिक और भौतिक दुनिया है जो हमें घेरती है और पृथ्वी पर जीवन संभव बनाती है। प्रकृति धरती का दिल है। प्रकृति हमें अच्छा करती है और हमारी स्वतंत्रता, प्रामाणिकता और हमारी आत्माओं के साथ संबंध बनाने में मदद करती है। बस प्रकृति को जोड़ने और महसूस करने से हमें एक दिव्य आनंद मिलता है। हमारा प्रकृति के साथ एक मजबूत बंधन और भावनात्मक संबंध है।

1 ) प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi – संभल जाओ ऐ दुनिया वालो

संभल जाओ ऐ दुनिया वालो
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !
रब करता आगाह हर पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!
लगा बारूद पहाड़, पर्वत उड़ाए
स्थल रमणीय सघन रहा नही !
खोद रहा खुद इंसान कब्र अपनी
जैसे जीवन की अब परवाह नही !!

लुप्त हुए अब झील और झरने
वन्यजीवो को मिला मुकाम नही !
मिटा रहा खुद जीवन के अवयव
धरा पर बचा जीव का आधार नहीं !!

नष्ट किये हमने हरे भरे वृक्ष,लताये
दिखे कही हरयाली का अब नाम नही !
लहलाते थे कभी वृक्ष हर आँगन में
बचा शेष उन गलियारों का श्रृंगार नही !

कहा गए हंस और कोयल, गोरैया
गौ माता का घरो में स्थान रहा नही !
जहाँ बहती थी कभी दूध की नदिया
कुंए,नलकूपों में जल का नाम नही !!

तबाह हो रहा सब कुछ निश् दिन
आनंद के आलावा कुछ याद नही
नित नए साधन की खोज में
पर्यावरण का किसी को रहा ध्यान नही !!

विलासिता से शिथिलता खरीदी
करता ईश पर कोई विश्वास नही !
भूल गए पाठ सब रामयण गीता के,
कुरान,बाइबिल किसी को याद नही !!

त्याग रहे नित संस्कार अपने
बुजुर्गो को मिलता सम्मान नही !
देवो की इस पावन धरती पर
बचा धर्म -कर्म का अब नाम नही !!

संभल जाओ ऐ दुनिया वालो
वसुंधरा पे करो घातक प्रहार नही !
रब करता आगाह हर पल
प्रकृति पर करो घोर अत्यचार नही !!

                                                                                          -डी. के. निवातियाँ

2 ) प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi – प्रकृति की लीला न्यारी

प्रकृति की लीला न्यारी,
कहीं बरसता पानी, बहती नदियां,
कहीं उफनता समंद्र है,
तो कहीं शांत सरोवर है।

प्रकृति का रूप अनोखा कभी,
कभी चलती साए-साए हवा,
तो कभी मौन हो जाती,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी गगन नीला, लाल, पीला हो जाता है,
तो कभी काले-सफेद बादलों से घिर जाता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी सूरज रोशनी से जग रोशन करता है,
तो कभी अंधियारी रात में चाँद तारे टिम टिमाते है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कभी सुखी धरा धूल उड़ती है,
तो कभी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

कहीं सूरज एक कोने में छुपता है,
तो दूसरे कोने से निकलकर चोंका देता है,
प्रकृति की लीला न्यारी है।

                                                                                                  – नरेंद्र वर्मा

3 ) प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi – क्षति हो रही है धरती की

वन, नदियां, पर्वत व सागर,
अंग और गरिमा धरती की,
इनको हो नुकसान तो समझो,
क्षति हो रही है धरती की।

हमसे पहले जीव जंतु सब,
आए पेड़ ही धरती पर,
सुंदरता संग हवा साथ में,
लाए पेड़ ही धरती पर।

पेड़ -प्रजाति, वन-वनस्पति,
अभयारण्य धरती पर,
यह धरती के आभूषण है,
रहे हमेशा धरती पर।

बिना पेड़ पौधों के समझो,
बढ़े रुग्णता धरती की,
हरी भरी धरती हो सारी,
सेहत सुधरे धरती की।

खनन, हनन व पॉलीथिन से,
मुक्त बनाएं धरती को,
जैव विविधता के संरक्षण की,
अलख जगाए धरती पर।

                   – रामगोपाल राही

4 ) प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi – आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें,
भूमि मेरी माता है,
और पृथ्वी का मैं पुत्र हूं।

मैदान, झीलें, नदियां, पहाड़, समुंद्र,
सब मेरे भाई-बहन है,
इनकी रक्षा ही मेरा पहला धर्म है।

अब होगी अति तो हम ना सहन करेंगे,
खनन-हनन व पॉलीथिन को अब दूर करेंगे,
प्रकृति का अब हम ख्याल रखेंगे।

हम सबका जीवन है सीमित,
आओ सब मिलकर जीवन में उमंग भरे,
आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

प्रकृति से हम है प्रकृति हमसे नहीं,
सब कुछ इसमें ही बसता,
इसके बिना सब कुछ मिट जाता।

आओ आओ प्रकृति से प्रेम करें।

– नरेंद्र वर्मा

5 ) प्रकृति पर हिंदी कविता Poem On Nature In Hindi – है महका हुआ गुलाब

है महका हुआ गुलाब
खिला हुआ कंवल है,
हर दिल मे है उमंगे
हर लब पे ग़ज़ल है,
ठंडी-शीतल बहे ब्यार
मौसम गया बदल है,
हर डाल ओढ़ा नई चादर
हर कली गई मचल है,
प्रकृति भी हर्षित हुआ जो
हुआ बसंत का आगमन है,
चूजों ने भरी उड़ान जो
गये पर नये निकल है,
है हर गाँव मे कौतूहल
हर दिल गया मचल है,
चखेंगे स्वाद नये अनाज का
पक गये जो फसल है,
त्यौहारों का है मौसम
शादियों का अब लगन है,
लिए पिया मिलन की आस
सज रही “दुल्हन” है,
है महका हुआ गुलाब
खिला हुआ कंवल है…!!

         -इंदर भोले नाथ

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