पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का जीवन परिचय Pranab Mukherjee Biography In Hindi

Pranab Mukherjee Biography In Hindi  प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें पूर्व राष्ट्रपति हैं। इससे पहले प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। जिन्हें साल 2019 में 70 वें गणतंत्र दिवस पर भारत के तत्कालिक राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी द्वारा भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया हैं।

Pranab Mukherjee Biography In Hindi

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव दा का जीवन परिचय Pranab Mukherjee Biography In Hindi

प्रणव मुखर्जी अस्सी बरस के, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सदस्य हैं जो एक अनुभवी भारतीय राजनीतिज्ञ भी हैं। भारत में अभी तक 13 राष्ट्रपति सत्ता में आ चुके है, वर्तमान में 13वें राष्ट्रपति के रूप में महामहिम प्रणव मुखर्जी विराजमान है।  2009 से 2012 तक वे देश के वित्त मंत्री रहे। राजनैतिज्ञ के अलावा प्रणव जी एक बहुत अच्छे सामाजिक कार्यकर्त्ता भी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विकास के लिए उनका जूनून देखते ही बनता है।

प्रणव मुखर्जी का जीवन परिचय-

प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गांव में 11 दिसम्बर 1935 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। प्रणब मुखर्जी के पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी है। प्रणब दा के पिता कांग्रेस पार्टी के सक्रिय सदस्य थे। घर में राजनैतिक माहोल होने की वजह से बचपन से ही प्रणव मुखर्जीजी का मन राजनीती में आने का था। इनके पिता भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रीय रूप से शामिल थे जिसके कारण वे उस दौरान कई बार जेल भी गए। प्रणब मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद इन्होंने कानून की पढाई कलकत्ता यूनिवर्सिटी से की थी।

शुरुआती ज़िंदगी और पेशा –

प्रणब मुखर्जी जी ने 13 जुलाई 1957 को सुव्रा मुखर्जी से शादी की। सुव्रा मुखर्जी का जन्म बांग्लादेश की नारेल में हुआ वहीं उनका शुरूआती जीवन भी व्यतीत हुआ। वे 10 साल की उम्र में कोलकाता चली गई और सन 1957 में प्रणब मुखर्जी जी से शादी कर ली। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे और 1952 से 1964 के बीच पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में AICC के सदस्य थे। उनकी मां राजलक्ष्मी मुखर्जी थीं उन्होंने सूरी में सूर्या विद्यासागर कॉलेज में पढ़ाई की, फिर कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध हुए। मुखर्जी जी के बड़े बेटे ने अपने पिता के नक्से कदम पर चलने का फैसला किया, और वे पश्चिम बंगाल राज्य के जंगीपुर से कांग्रेस के सांसद बन गये।

राजनैतिक सफ़र –

  • करियर की शुरुवात प्रणव मुखर्जीजी ने पोस्ट एंड टेलेग्राफ़ ऑफिस से की थी जहां वे एक क्लर्क थे। 1963 में विद्यानगर कॉलेज में वे राजनीती शास्त्र के प्रोफेसर बन गए।
  • 1963 में, उन्होंने विद्यानगर कॉलेज (दक्षिण 24 परगना में) में राजनीतिक विज्ञान पढ़ाना शुरू किया और राजनीति में प्रवेश करने से पहले उन्होंने देशर डाक (मातृभूमि की पुकार) के साथ एक पत्रकार के रूप में भी काम किया।
  • प्रणव मुखर्जी जी ने राजनैतिक सफ़र की शुरुवात 1969 में की. वे कांग्रेस का टिकट प्राप्त कर राज्यसभा के सदस्य बन गए, 4 बार वे इस पद के लिए चयनित हुए।
  • मुखर्जी जी सन 1980 के दशक से सन 2012 तक आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ़्रीकी विकास बैंक के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में भी शामिल थे।
  • सन 1999 से 2012 तक प्रणव मुखर्जी जी केंद्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष रहे।  मुखर्जी 1982 से 1984 तक वित्त मंत्री बनने के लिए कैबिनेट पदों की एक श्रृंखला के माध्यम से असंतुष्ट और उठे।
  • 2004 में प्रणव मुखर्जीजी ने जंगीपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर लोकसभा सदस्य बन गए। 1985 से प्रणव जी जो पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे। 2012 में प्रणव मुखर्जीजी पी.ए. संगमा को 70% वोटों से हराकर राष्ट्रपति पद पर विराजमान हो गए।

अवार्ड्स –

  • प्रणब मुखर्जी जी को राष्ट्रीय पुरस्कार ‘भारत रत्न’ मिलने से पहले सन 2008 में ‘पद्मा श्री’ जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • प्रणब मुखर्जी जी को विदेश में भी सम्मान मिला है, इन्हें सन 2013 में बांग्लादेश की ओर से बांग्लादेश के दुसरे सर्वोच्च पुरस्कार ‘बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ऑनर’ सम्मान दिया गया था। इसके अलावा सन 2016 में आइवरी कोस्ट की ओर से ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ नेशनल ऑर्डर ऑफ़ द आइवरी कोस्ट’ से भी सम्मानित किया गया था।
  • 2007 में देश के दुसरे बड़े सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 2010 में प्रणव जी को एक रिसर्च के बाद ‘फाइनेंस मिनिस्टर ऑफ़ दी इयर फॉर एशिया’ के लिए अवार्ड दिया गया।
  • 2011 में वोल्वरहैम्टन विश्वविद्यालय द्वारा प्रणव जी को डोक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।

प्रणब मुखर्जी द्वारा लिखी गई पुस्तकें

  1. वर्ष 1969 में मिड-टर्म पोल
  2. उत्तरजीविता से परे – वर्ष 1984 में भारतीय अर्थव्यवस्था का उभरते आयाम
  3. वर्ष 1987 में ट्रैक बंद
  4. वर्ष 1992 में राष्ट्र से पहले चुनौतियां
  5. वर्ष 1992 में संग्राम और साक्षात्कार की सागा

प्रणब मुखर्जी की मृत्यु –

प्रणब मुखर्जी की मृत्यु 31 अगस्त 2020 को 84 वर्ष की आयु में हुआ, जिसकी पुष्टि उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्विटर के माध्यम से की । यह अस्पताल में तब हुआ जब उनकी तबीयत बिगड़ने की पुष्टि करते हुए बताया कि वह एक दिन पहले ही सेप्टिक सदमे में थे, जो एक दिन पहले फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुआ था।

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