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स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय – Stephen Hawking Biography in Hindi

Stephen Hawking Biography in Hindi स्टीफन हॉकिंग को इतिहास के सबसे शानदार सैद्धांतिक भौतिकविदों में से एक माना जाता था। बिग बैंग से लेकर ब्लैक होल तक ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना पर उनके काम ने क्षेत्र में क्रांति ला दी, जबकि उनकी सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तकों ने उन पाठकों से अपील की है, जिनके पास हॉकिंग की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि नहीं हो सकती है। 14 मार्च 2018 को हॉकिंग का निधन हो गया। मशहूर साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग ने विज्ञान क्षेत्र में काफी योगदान दिया है।

Stephen Hawking Biography in Hindi

स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय – Stephen Hawking Biography in Hindi

स्टीफन हॉकिंग का जीवन शुरू से ही काफी कठिनाइयों से भरा हुआ था, लेकिन फिर भी उन्होंने वैज्ञानिक बनने के अपने सपने को पूरा किया। हॉकिंग ने यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड (B.A, 1962) और ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज (Ph.D., 1966) में भौतिकी का अध्ययन किया। उन्हें कैम्ब्रिज में गोनविले और कैयस कॉलेज में एक रिसर्च फेलो चुना गया। 1960 के दशक की शुरुआत में हॉकिंग ने एम्योट्रोफिक लेटरल स्केलेरोसिस का अनुबंध किया था, जो एक लाइलाज अपक्षयी न्यूरोमस्कुलर रोग है। बीमारी के उत्तरोत्तर अक्षम होने के बावजूद उन्होंने काम करना जारी रखा।

 

स्टीफन हॉकिंग का जन्म :-

स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म 8 जनवरी, 1942 को इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड में फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग दंपत्ति के घर मे हुआ था। इसे महज एक संयोग ही माना जा सकता है कि हॉकिंग का जन्म महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली के देहांत के ठीक तीन सौ वर्ष बाद हुआ था। स्टीफन हॉकिंग के माता और पिता का घर नॉर्थ लंदन में हुआ करता था। लेकिन इस युद्ध के कारण उन्हें अपना घर बदलना पड़ा और वो लंदन की एक सुरक्षित जगह पर आकर रहने लगे।

द्वितीय विश्व युद्ध का समय आजीविका अर्जन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था और एक सुरक्षित जगह की तलाश में उनका परिवार ऑक्सफोर्ड आ गया। 1965 में उनका विवाह उनके भावनात्मक जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम था। विवाह ने उसे दिया, उसे याद किया, विज्ञान की दुनिया में रहने और व्यावसायिक प्रगति करने का दृढ़ संकल्प। हॉकिंग ने 1966 में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के साथ अपने आजीवन शोध और शिक्षण संघ की शुरुआत की।

स्टीफन हॉकिंग की बीमारी :-

जब स्टीफन 21 वर्ष के थे तो एक बार छुट्टियां मनाने के लिए अपने घर पर आये हुए थे। वे सीढ़ियों से उतर रहे थे कि तभी उन्हें बेहोशी का एहसास हुआ और वे तुरंत ही नीचे गिर पड़े। उन्हें फैमली डॉक्टर के पास ले जाया गया शुरू में उन्होंने उसे मात्र एक कमजोरी के कारण हुई घटना मानी, मगर बार-बार ऐसा होने पर उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरो के पास ले जाया गया, जहाँ यह पता चला कि वे अमायो‍ट्राफिक लेटरल स्‍कलेरोसिस (मोटर न्यूरॉन) नामक एक दुर्लभ और असाध्य बीमारी से ग्रस्त हैं।

इस बीमारी में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं, जिसके कारण शरीर के सारे अंग बेकाम हो जाते हैं और अंतत: मरीज घुट-घुट कर मर जाता है। लेकिन उन्होंने अपनी इस बीमारी को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया. बीमार होने के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरा किया और साल 1965 में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की. पीएचडी में इनके थीसिस का शीर्षक ‘प्रॉपर्टीज ऑफ एक्सपांडिंग यूनिवर्स‘ था.

स्टीफन हॉकिंग का करियर :-

हॉकिंग कैम्ब्रिज में अपने स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद, शोध के साथी और बाद में एक पेशेवर साथी के रूप में काम करते रहे। 1974 में, उन्हें रॉयल सोसाइटी में शामिल किया गया, जो दुनिया भर में वैज्ञानिकों की फैलोशिप थी। 1979 में, उन्हें कैम्ब्रिज में गणित के लुकासियन प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, जो दुनिया की सबसे प्रसिद्ध अकादमिक कुर्सी थी (दूसरा धारक सर आइजैक न्यूटन, रॉयल सोसाइटी के सदस्य भी थे)।

स्टीफन हॉकिंग को मिले पुरस्कार और उपलब्धियां :-

  • साल 1966 में स्टीफन हॉकिंग को एडम्स पुरस्कार दिया गया था। इस पुरस्कार के बाद इन्होंने साल 1975 में एडिंगटन पदक और साल 1976 में मैक्सवेल मेडल एंड प्राइज मिला था।
  • हेइनीमान पुरस्कार (Heineman Prize) हॉकिंग को साल 1976 में दिया गया था। इस पुरस्कार को पाने के बाद इन्हें साल 1978 में एक ओर पुरस्कार से नवाजा गया था और इस पुरस्कार का नाम अल्बर्ट आइंस्टीन मेडल था।
  • साल 1985 में हॉकिंग को आरएएस गोल्ड मेडल और साल 1987 डिराक मेडल ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल भी दिया गया था। इसके बाद सन् 1988 में इस महान वैज्ञानिक को वुल्फ पुरस्कार भी दिया गया था।

स्टीफन हॉकिंग का निधन :-

हॉकिंग लंबे समय से बीमार चल रहे थे। एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस बीमारी के कारण इन्होंने अपने जीवन के लगभग 53 साल व्हील चेयर पर बताए हैं।वहीं 14 मार्च को इस महान वैज्ञानिक ने अपनी अंतिम सांस इग्लैंड में ली है।

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Rohit Singh

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