एक अन्धे की कहानी Story Of A Blind In Hindi

यह एक प्रेरणादायक हिन्दी कहानी है और एक अंधे की कहानी है , Story Of A Blind In Hindi एक अन्धे को किसी अपराध में जन्म भर की कैद हो गई। उसे जेल में बन्द कर दिया गया। Story Of A Blind In Hindi

Story Of A Blind

एक अन्धे की कहानी Story Of A Blind In Hindi

एक दिन राजमंत्री जेल का मुआयना करने आये तो उन्हें अन्धे कैदी पर दया आई, और अधिकारियों को नोट करा दिया कि यदि यह अन्धा जेल के फाटक से बाहर निकल रहा हो तो उसे रोका न जाय।

अन्धे को इस सूचना से बड़ी प्रसन्नता हुई। वह जेल का फाटक बाहर निकलने के लिए तलाश करने लगा। इस के लिए उसने उपाय सोचा कि जेल की दीवार पकड़ ली जाय और घूमते-घूमते जब भी फाटक आये तभी बाहर निकल जाय।

अन्धे के सिर में खाज थी। ठंड लगते ही वह बढ़ जाती थी। जेल के फाटक पर फव्वारे लगे थे। उन्हें छूकर ठंडी हवा आती थी। फाटक पर आते ही ठंडी हवा से खाज बढ़ जाती। अन्धा दीवार छोड़कर दोनों हाथों से सिर खुजाने लगता साथ ही चलता भी रहता। इसी बीच फाटक निकल जाता और उसे फिर जेल का पूरा चक्कर लगाना पड़ता। इस प्रकार उसे कितने ही चक्कर काटने पड़े पर कभी सौभाग्य न आया कि वह फाटक से बाहर निकल सके।

इसी भाँति मनुष्य शरीर भी जीवात्मा की जेल है। जीव अन्धा कैदी है, अध्यात्मिक उत्कर्ष ही उसकी मुक्ति का फाटक है। जब जीवन मुक्ति का सुयोग आता है तब मनुष्य लोभ, मोह की वासना, तृष्णा की खुजली खुजाने लगता है। और उसी भव-बंधन में चक्कर काटता रहता है।

“जनम-जनम मुनि जतन कराहीं,
अंत राम कहि आवत नाहीं॥”

शुभ प्रभात । आज का दिन आपके लिए शुभ एवं मंगलमय हो

एक दिन राजमंत्री जेल का मुआयना करने आये तो उन्हें अन्धे कैदी पर दया आई, और अधिकारियों को नोट करा दिया कि यदि यह अन्धा जेल के फाटक से बाहर निकल रहा हो तो उसे रोका न जाय।

अन्धे को इस सूचना से बड़ी प्रसन्नता हुई। वह जेल का फाटक बाहर निकलने के लिए तलाश करने लगा। इस के लिए उसने उपाय सोचा कि जेल की दीवार पकड़ ली जाय और घूमते-घूमते जब भी फाटक आये तभी बाहर निकल जाय। Story Of A Blind In Hindi

अन्धे के सिर में खाज थी। ठंड लगते ही वह बढ़ जाती थी। जेल के फाटक पर फव्वारे लगे थे। उन्हें छूकर ठंडी हवा आती थी। फाटक पर आते ही ठंडी हवा से खाज बढ़ जाती। अन्धा दीवार छोड़कर दोनों हाथों से सिर खुजाने लगता साथ ही चलता भी रहता। इसी बीच फाटक निकल जाता और उसे फिर जेल का पूरा चक्कर लगाना पड़ता। इस प्रकार उसे कितने ही चक्कर काटने पड़े पर कभी सौभाग्य न आया कि वह फाटक से बाहर निकल सके।

इसी भाँति मनुष्य शरीर भी जीवात्मा की जेल है। जीव अन्धा कैदी है, अध्यात्मिक उत्कर्ष ही उसकी मुक्ति का फाटक है। जब जीवन मुक्ति का सुयोग आता है तब मनुष्य लोभ, मोह की वासना, तृष्णा की खुजली खुजाने लगता है। और उसी भव-बंधन में चक्कर काटता रहता है।

“जनम-जनम मुनि जतन कराहीं,
अंत राम कहि आवत नाहीं॥”

एक अन्धे को किसी अपराध में जन्म भर की कैद हो गई। उसे जेल में बन्द कर दिया गया।

एक दिन राजमंत्री जेल का मुआयना करने आये तो उन्हें अन्धे कैदी पर दया आई, और अधिकारियों को नोट करा दिया कि यदि यह अन्धा जेल के फाटक से बाहर निकल रहा हो तो उसे रोका न जाय।

अन्धे को इस सूचना से बड़ी प्रसन्नता हुई। वह जेल का फाटक बाहर निकलने के लिए तलाश करने लगा। इस के लिए उसने उपाय सोचा कि जेल की दीवार पकड़ ली जाय और घूमते-घूमते जब भी फाटक आये तभी बाहर निकल जाय।

अन्धे के सिर में खाज थी। ठंड लगते ही वह बढ़ जाती थी। जेल के फाटक पर फव्वारे लगे थे। उन्हें छूकर ठंडी हवा आती थी। फाटक पर आते ही ठंडी हवा से खाज बढ़ जाती। अन्धा दीवार छोड़कर दोनों हाथों से सिर खुजाने लगता साथ ही चलता भी रहता। इसी बीच फाटक निकल जाता और उसे फिर जेल का पूरा चक्कर लगाना पड़ता। इस प्रकार उसे कितने ही चक्कर काटने पड़े पर कभी सौभाग्य न आया कि वह फाटक से बाहर निकल सके।

इसी भाँति मनुष्य शरीर भी जीवात्मा की जेल है। जीव अन्धा कैदी है, अध्यात्मिक उत्कर्ष ही उसकी मुक्ति का फाटक है। जब जीवन मुक्ति का सुयोग आता है तब मनुष्य लोभ, मोह की वासना, तृष्णा की खुजली खुजाने लगता है। और उसी भव-बंधन में चक्कर काटता रहता है।

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मेरा नाम सृष्टि तपासे है और मै प्यारी ख़बर की Co-Founder हूं | इस ब्लॉग पर आपको Motivational Story, Essay, Speech, अनमोल विचार , प्रेरणादायक कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी | आपके सहयोग से मै अच्छी जानकारी लिखने की कोशिश करुँगी | अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

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