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Vaishnodevi Mandir वैष्णो देवी मंदिर की विस्तृत जानकारी

माता वैष्णो देवी मंदिर यह हिन्दू मंदिरों में से सबसे पवित्र माना जाता है | यह भारत में जम्मू -कश्मीर के पहाड़ी पर विराजमान है | वैष्णो देवी को माता राणी और वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है | Vaishnodevi Mandir वैष्णो देवी मंदिर की विस्तृत जानकारी

Vaishnodevi Mandir

Vaishnodevi Mandir वैष्णो देवी मंदिर की विस्तृत जानकारी

यह मंदिर जम्मू -कश्मीर के जम्मू जिले में कटरा नगर के नजदीक है |यह मंदिर समुद्रतल से 5,200 फीट की ऊंचाई पर कटरा नगर से लगभग 12 किलोमीटर की दुरी पर है | यहाँ हर वर्ष लाखों भाविक वैष्णो देवी का दर्शन करने के लिए आते है |

यात्रा :

माँ वैष्णो देवी यात्रा की शुरुवात कटरा से होती है | ज्यादा से ज्यादा यात्री यहाँ विश्राम करने के बाद ही इस यात्रा की शुरुआत करते है | इस यात्रा के लिए भाविक रातभर चढ़ाई का काम करते है | कटरा से ही सभी भाविक को निशुल्क यात्रा पर्ची मिलती है | पर्ची मिलने के तीन घंटे  बाद आपको चढ़ाई के पहले “बाणगंगा ” चेक पॉइंट पर एंट्री करनी पड़ती है | यहाँ आपके सामान की चेकिंग होती है |

यदि आप पर्ची लेने के छह घंटे तक एंट्री नहीं कराते तो वह पर्ची रद्द की जायेगी | पूरी यात्रा में आपको भोजन और जलपान की व्यवस्था की गई है | कम समय में माँ वैष्णो देवी का दर्शन करने के लिए आप हेलीकॉप्टर की  भी सुविधा ले सकते हो लेकिन इसके लिए आपको 700 से 1000 रुपये भाड़ा देना पड़ता है |

परिवहन :

माँ वैष्णो देवी मंदिर का दर्शन करने के लिए आपको जम्मू यह शहर नजदीक है | यहाँ आप रेलमार्ग , सड़कमार्ग और वायुमार्ग का वापर कर सकते हो | जम्मू तक बस ,टैक्सी , रेल तथा हवाई जहाज का वापर करके आ सकते हो |

दर्शन :

कटरा व जम्मू के नज़दीक कई दर्शनीय स्थल ‍व हिल स्टेशन हैं, जहाँ जाकर आप जम्मू की ठंडी हसीन वादियों का लुत्फ उठा सकते हैं। जम्मू में अमर महल, बहू फोर्ट, मंसर लेक, रघुनाथ टेंपल आदि देखने लायक स्थान हैं। जम्मू से लगभग 112 किमी की दूरी पर ‘पटनी टॉप’ एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। सर्दियों में यहाँ आप स्नो फॉल का भी मजा ले सकते हैं। कटरा के नजदीक शिव खोरी, झज्झर कोटली, सनासर, बाबा धनसार, मानतलाई, कुद, बटोट आदि कई दर्शनीय स्थल हैं।

मान्यता :

समय के साथ-साथ, देवी मां के बारे में कई कहानियां उभरीं. ऐसी ही एक कहानी है श्रीधर की। श्रीधर मां वैष्णो देवी का प्रबल भक्त थे। वे वर्तमान कटरा कस्बे से 2 कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित हंसली गांव में रहता थे। एक बार मां ने एक मोहक युवा लड़की के रूप में उनको दर्शन दिए। युवा लड़की ने विनम्र पंडित से ‘भंडारा’ (भिक्षुकों और भक्तों के लिए एक प्रीतिभोज) आयोजित करने के लिए कहा. पंडित गांव और निकटस्थ जगहों से लोगों को आमंत्रित करने के लिए चल पड़े. उन्होंने एक स्वार्थी राक्षस ‘भैरव नाथ’ को भी आमंत्रित किया। भैरव नाथ ने श्रीधर से पूछा कि वे कैसे अपेक्षाओं को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। उसने श्रीधर को विफलता की स्थिति में बुरे परिणामों का स्मरण कराया. चूंकि पंडित जी चिंता में डूब गए, दिव्य बालिका प्रकट हुईं और कहा कि वे निराश ना हों, सब व्यवस्था हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 360 से अधिक श्रद्धालुओं को छोटी-सी कुटिया में बिठा सकते हो। उनके कहे अनुसार ही भंडारा में अतिरिक्त भोजन और बैठने की व्यवस्था के साथ निर्विघ्न आयोजन संपन्न हुआ। भैरव नाथ ने स्वीकार किया कि बालिका में अलौकिक शक्तियां थीं और आगे और परीक्षा लेने का निर्णय लिया। उसने त्रिकुटा पहाड़ियों तक उस दिव्य बालिका का पीछा किया। 9 महीनों तक भैरव नाथ उस रहस्यमय बालिका को ढूँढ़ता रहा, जिसे वह देवी मां का अवतार मानता था। भैरव से दूर भागते हुए देवी ने पृथ्वी पर एक बाण चलाया, जिससे पानी फूट कर बाहर निकला। यही नदी बाणगंगा के रूप में जानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि बाणगंगा (बाण: तीर) में स्नान करने पर, देवी माता पर विश्वास करने वालों के सभी पाप धुल जाते हैं। नदी के किनारे, जिसे चरण पादुका कहा जाता है, देवी मां के पैरों के निशान हैं, जो आज तक उसी तरह विद्यमान हैं। इसके बाद वैष्णो देवी ने अधकावरी के पास गर्भ जून में शरण ली, जहां वे 9 महीनों तक ध्यान-मग्न रहीं और आध्यात्मिक ज्ञान और शक्तियां प्राप्त कीं. भैरव द्वारा उन्हें ढूंढ़ लेने पर उनकी साधना भंग हुई। जब भैरव ने उन्हें मारने की कोशिश की, तो विवश होकर वैष्णो देवी ने महा काली का रूप लिया। दरबार में पवित्र गुफा के द्वार पर देवी मां प्रकट हुईं. देवी ने ऐसी शक्ति के साथ भैरव का सिर धड़ से अलग किया कि उसकी खोपड़ी पवित्र गुफा से 2.5 कि॰मी॰ की दूरी पर भैरव घाटी नामक स्थान पर जा गिरी.

भैरव ने मरते समय क्षमा याचना की। देवी जानती थीं कि उन पर हमला करने के पीछे भैरव की प्रमुख मंशा मोक्ष प्राप्त करने की थी। उन्होंने न केवल भैरव को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्रदान की, बल्कि उसे वरदान भी दिया कि भक्त द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कि तीर्थ-यात्रा संपन्न हो चुकी है, यह आवश्यक होगा कि वह देवी मां के दर्शन के बाद, पवित्र गुफा के पास भैरव नाथ के मंदिर के भी दर्शन करें। इस बीच वैष्णो देवी ने तीन पिंड (सिर) सहित एक चट्टान का आकार ग्रहण किया और सदा के लिए ध्यानमग्न हो गईं।

इस बीच पंडित श्रीधर अधीर हो गए। वे त्रिकुटा पर्वत की ओर उसी रास्ते आगे बढ़े, जो उन्होंने सपने में देखा था। अंततः वे गुफा के द्वार पर पहुंचे। उन्होंने कई विधियों से ‘पिंडों’ की पूजा को अपनी दिनचर्या बना ली। देवी उनकी पूजा से प्रसन्न हुईं. वे उनके सामने प्रकट हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। तब से, श्रीधर और उनके वंशज देवी मां वैष्णो देवी की पूजा करते आ रहे है|

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Srushti Tapase

मेरा नाम सृष्टि तपासे है और मै प्यारी ख़बर की Co-Founder हूं | इस ब्लॉग पर आपको Motivational Story, Essay, Speech, अनमोल विचार , प्रेरणादायक कहानी पढ़ने के लिए मिलेगी | आपके सहयोग से मै अच्छी जानकारी लिखने की कोशिश करुँगी | अगर आपको भी कोई जानकारी लिखनी है तो आप हमारे ब्लॉग पर लिख सकते हो |

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